Vyang Ke Naye Chehre - Purnima Surinder Kaur
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Vyang Ke Naye Chehre - Purnima Surinder Kaur
About The Product:
व्यंग्य, समकालीन विसंगतियों से लड़ने का सबसे सक्षम भाषिक प्रयोग है। इसमें हिंदी के युवा व्यंग्यकारों की ताज़ा अभिव्यक्तियाँ हैं। शिवम् चौकसे धार्मिक आस्था और पाखंड के पीछे अनिवार्यतः मौजूद रहने वाले क्षद्म को बेपर्दा करते हैं। उन्हें पढ़ते हुए परसाई जी की रचना 'वैष्णव की फिसलन भी याद आएगी। व्यंग के नये चहरे पूर्णिमा, अस्मिता मौर्य और अर्चिता सावर्ण्य को पढ़ते हुए इस बात पर ध्यान जाना चाहिए कि हिंदी व्यंग्य विधा में स्त्रियों की संख्या कितनी कम है। उस लिहाज से इस संकलन में तीन महिला व्यंग्यकारों का नाम अपर्याप्त होकर भी उल्लेखनीय कहा जाएगा। इन तीन युवा व्यंग्यकारों की शैली कथात्मक है। संजय गोरा खेल विधा को प्रभावी ढंग से व्यंग्य और विनोद में बदल देते हैं। शीतल रघुवंशी, चिराग अग्रवाल, दीपेश और सचिन शर्मा किंचित कथात्मकता, गल्प और मुहावरों का प्रभावी इश्तेमाल करते हैं। प्रिय युवा व्यंग्यकारों में सबसे प्रतिष्ठित नाम है। उनका व्यंग्य पढ़ते हुए इसका कारण भी समझ आएगा।
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