Suno Maa सुनो माँ! : Letters Written By WorldS Famous Personalities To Their Mothers Book In Hindi | The Mother-Sundeep Bhutoria
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Suno Maa सुनो माँ! : Letters Written By WorldS Famous Personalities To Their Mothers Book In Hindi | The Mother-Sundeep Bhutoria
About the Products:
भारतीय रेल का एक कर्मचारी, जिसने केवल इसलिए सप्ताह में चार भारतीय रेल को कुर तक की यात्रा का गान किया, क्योकि इस यात्रा के बीच एक स्टेशन ऐसा आता है, जहाँ पर उसकी माँ रहती है। वहीं पर उसकी माँ अपने हाथों से बने खाने के साथ अपने बेटे की प्रतीक्षा करती है और बेटा भी अपनी माँ का चेहरा देखने के लिए लालायित रहता है। इस धरती पर माता का प्यार दैवीय प्रेम का सबसे निकटतम रूप होता है। हमारी माता जीवन की पहली शिक्षक होती है, वही हमें जीवन जीना सिखाती है। उसका लाड़-प्यार हमारे भीतर साहस और आत्मविश्वास के उस तत्त्व की रचना करता है, जो जीवनपर्यंत कठिन चुनौतियों का सामना करने हेतु आवश्यक होता है। वह जीवन की सबसे पहली और सच्ची दोस्त होती है। उसका घर, परिवार और रसोईघर, वह जगह होती है, जहाँ पर जाकर हम तरोताजगी और नव ऊर्जा का अनुभव करते हैं। एक माँ का प्यार उसकी संतान को जीवन भर उस स्थिति में भी सँभाले रखता है, जब माँ इस दुनिया से विदा हो जाती है। सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि कुछ माँ ऐसी भी होती हैं, जो अपने ही बच्चे के साथ छल करती हैं। इस पुस्तक में एक छोटी सी लड़की लिली दिल तोड़ने वाली अपनी दुःखद कहानी सुनाती है। इस कहानी में शिकार लड़की गुलामों का व्यापार करनेवालों के चंगुल में फँस चुकी है और हमें किसी भी तरह से उसे वहाँ से मुक्त करवाना है। लिली मानव तस्करी के विरुद्ध लिली मानव तस्करी के विरुद्ध - यह नाम चार साल की एक लड़की के नाम पर रखा गया है। लिली को पचास डॉलर के लिए एक दलाल को बेच दिया गया था और उस दलाल ने उसे आगे सौ डॉलर के लिए एक वेश्यालय में बेच दिया। यह बहुत ही चौंकाने वाली बात है कि कितनी आसानी से एक बच्ची का सौदा कर दिया गया। आप मात्र कल्पना करें कि एक बच्ची की नीलामी मवेशियों की तरह की गई। कल्पना करें कि एक बच्ची को दूसरे देश में अवैध तरीके से भेजा गया, जहाँ पर आप मात्र एक कैदी हों। कल्पना करें कि एक बच्चे की अपनी माँ उसे चार साल की छोटी सी अवस्था में बेच दे । यह सब लिली के साथ घटित हुआ । लिली एक आश्रय गृह में बड़ी हुई और उसके जीवन का उद्देश्य माँओं को अपने बच्चों से प्यार करना सिखाना है। क्योंकि मेरी माँ मुझसे प्यार नहीं करती, अन्यथा वह मुझे कभी नहीं बेचती - उसका यह कथन ही इस पुस्तक का प्रेरणास्त्रोत है। लिली के माध्यम से हम इस समस्या की जड़ से निपटने और मानव तस्करी को रोकने के प्रयास शिक्षा व रोजगार की अपनी पहल के मजबूत भाग के साथ करते हैं। हमने भारत, नेपाल और यू.के. के संगठनों के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया है। लिली के समर्थन प्राप्त प्रोजेक्ट्स की तसवीरें विपुल संगोई द्वारा उपलब्ध करवाई गईं। ये हमारे क्रिया-कलापों की व्यापक रेंज, जो मुफ्त स्कूलों से लेकर संगीत और नृत्य सिखाने वाली कक्षाओं, रोजगारपरक बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण तक विस्तृत हैं, को दरशाती हैं। लिली कमेटी स्वेच्छा से काम करती है। हमारे काम ने 3,00,000 जिंदगियों को स्पर्श किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी का व्यवसाय वार्षिक स्तर पर 100 बिलियन डॉलर का अनुमानित है और इसमें निरंतर विस्तार हो रहा है। यह किसी के भी साथ, किसी भी समय हो सकता है।
Language: Hindi
Page No: 156
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