Shayari Sadabahar: Saye Se Mukhatib - Sanju Shabdita
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Shayari Sadabahar: Saye Se Mukhatib - Sanju Shabdita
About The Product:
‘‘नये शायरों की जब फ़ेहरिस्त बनाई जायेगी तो संजू शब्दिता की शायरी सरे फ़ेहरिस्त होगी। अपनी गहरी समझ, और ख़ूबसूरत लहजे को उन्होंने अपना शियार बनाया है। उनके कलाम में मासूमियत, अपनाइयत, सदाक़त, फ़रहत और मोहब्बत के जज़्बात के अलावा भोलापन, बे-ज़मीरी के शिकवे, तन्हाइयों के ग़म जगह-जगह मिलते हैं।’’ - शारिक़ कैफ़ी प्रसिद्ध उर्दू शायर ‘‘यह कहने में मुझे कोई झिझक नहीं है कि समकालीन शायरों में जिन दो शायरों ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया संजू उनमें से एक हैं। संजू शब्दिता की शायरी में दो विशेषताएँ हैं: पहली, उनकी शायरी में अलंकरण की जगह सादगी, जो उनको सबसे अलग कर देती है। दूसरी, उनकी शायरी पर फ़ेमीनिज़्म का गहरा रंग है, लेकिन बिना लाउड हुए। स्त्री-जीवन के ऐसे अनुभवों, एहसासों के साथ जिनके ऊपर अक्सर ध्यान भी नहीं जाता जो अनकहा रह जाता है।’’ - प्रभात रंजन प्रसिद्ध लेखक, संपादक साहित्य में NET, JRF और पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त संजू शब्दिता एक संवेदनशील शायरा हैं, जो ज़िन्दगी को देखने का अपना अलग नज़रिया रखती हैं और उसे बयान करने का अंदाज़ सबसे अलग है। रेडियो, टीवी चैनलों एवं कई काव्य-मंचों से उनकी रचनाओं का व्यापक प्रसारण हुआ है। प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी ग़ज़लें नियमित प्रकाशित होती रही हैं। साये से मुख़ातिब संजू शब्दिता की शायरी का पहला मजमुआ है।
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