अलंकार (सचित्र, परिष्कृत और संस्करण) | Grocsy

अलंकार (सचित्र, परिष्कृत और संस्करण)

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अलंकार (सचित्र, परिष्कृत और संस्करण)

About The Product:

अलंकार by मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) हिंदी साहित्य की एक विचारोत्तेजक और संवेदनशील कृति है, जिसमें लेखक ने मानव स्वभाव, सामाजिक दिखावे और नैतिक मूल्यों के बीच के टकराव को अत्यंत सूक्ष्मता से प्रस्तुत किया है। यह रचना केवल बाहरी ornamentation या सामाजिक अलंकरण की नहीं, बल्कि उस मानसिक और नैतिक अलंकार की पड़ताल करती है, जो मनुष्य के चरित्र को वास्तव में महान या खोखला बनाता है। प्रेमचंद की सधी हुई भाषा और यथार्थवादी दृष्टि इस कहानी को गहराई और स्थायित्व प्रदान करती है। इस पुस्तक का मुख्य आकर्षण इसका social realism और psychological depth है। प्रेमचंद समाज में व्याप्त आडंबर, झूठे सम्मान और बाहरी चमक के पीछे छिपी सच्चाई को उजागर करते हैं। कथा यह प्रश्न उठाती है कि क्या सच्चा सौंदर्य बाहरी प्रदर्शन में है या inner character, नैतिकता और मानवीय संवेदना में। पात्रों के माध्यम से लेखक दिखाते हैं कि कैसे सामाजिक अपेक्षाएँ व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप से दूर कर देती हैं, और कैसे सच्चा अलंकार आत्मिक गुणों से निर्मित होता है। अलंकार उन पाठकों के लिए विशेष रूप से मूल्यवान है जो Hindi literature, Munshi Premchand stories, classic Indian fiction और social co (mm) entary में रुचि रखते हैं। यह रचना आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि दिखावे और वास्तविक मूल्य के बीच का संघर्ष आधुनिक समाज में और भी गहरा हो गया है। मानवीय संवेदना, नैतिक विवेक और यथार्थ जीवन के सूक्ष्म चित्रण के कारण यह पुस्तक हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए एक प्रभावशाली और स्मरणीय अनुभव प्रदान करती है।

  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 148
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