Lachhaman Gun Gatha-Rajendra Arun, Vinod Bala Arun
FREE shipping on orders above $55.00 USD
Shipping
| Cart Value (USD) |
Greater than $55 |
$35-$54.99 | $25-$34.99 | $15-$24.99 | Less than $14.99 |
|---|---|---|---|---|---|
| Shipping Rates(USD) |
FREE | $5.97 | $9.97 | $11.97 | $16.97 |
Enjoy hassle-free 14-day returns. Learn more in our Return Policy.
Lachhaman Gun Gatha-Rajendra Arun, Vinod Bala Arun
About the Products:
रामकथा में लक्ष्मणजी का चरित्र सबसे विचित्र, सबसे अनुपम और सबसे भिन्न है। वे केवल श्रीराम के अनुज ही नहीं, बल्कि उनके सहचर और अनुचर भी हैं, प्राण और अंतरात्मा भी हैं, सुहृद् और भक्त भी हैं तथा दर्पण और प्रतिबिंब भी हैं। वास्तव में वे उनके सर्वस्व हैं। दोनों का जीवन प्रेम और विश्वास के अटूट सूत्र से बँधा हुआ है, जहाँ किसी प्रकार के दुराव, छिपाव और अलगाव की कोई गुंजाइश नहीं। विश्व इतिहास में ऐसा चरित्र मिलना दुर्लभ है, जिसने अपने अग्रज की सेवा में अपने अस्तित्व का पूर्णतया विसर्जन कर दिया हो और उसी में अपने जीवन की धन्यता और सार्थकता पाई हो। लक्ष्मण महापराक्रमी, श्रेष्ठ योद्धा, बुद्धिमान्, धर्मज्ञ, नीतिज्ञ, शास्त्रज्ञ, वाक्-निपुण, दूरदर्शी, सेवाव्रती, आत्मवान्, जितेंद्रिय, परम संयमी, वैराग्यवान् और सदाचारी होने के साथ-ही-साथ अनेक कलाओं में भी निपुण थे। त्याग, सेवा और समर्पण के वे मूर्तिमान् स्वरूप थे। यह पुस्तक मुख्य रूप से रामचरितमानस पर आधारित है, परंतु आवश्यकतानुसार वाल्मीकि रामायण से भी सहायता ली गई है। महर्षि वाल्मीकि ने लक्ष्मणजी के कुछ गुणों, जैसे—सेवा, पर्णकुटी बनाने की दक्षता, पुरुषार्थ के प्रति निष्ठा, सीताजी के वियोग में संतप्त श्रीराम का मनोबल बढ़ाने की कला आदि का बहुत ही सजीव वर्णन किया है। लक्ष्मणजी की यशोगाथा को सत्रह अध्यायों में विभाजित किया गया है। हर अध्याय का नाम चौपाई विशेष की अर्द्धाली के आधार पर रखा गया है और अध्यायों का क्रम रामचरितमानस में आई चौपाइयों के क्रमानुसार सुनिश्चित किया गया है।
Language: Hindi
Page No: 264
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.