Kabootarbaaz - Vinay Sultan
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Kabootarbaaz - Vinay Sultan
About The Product:
अय्यारों से लेकर यारों तक और जहाज़ियों से लेकर सिपहसालारों तक, प्यार और जंग में इंसानों का दम भर साथ दिया है कबूतरों ने। भला हो उन इतिहास की किताबों का जो न लिखी गईं और न कबूतरों ने पढ़ीं, वरना कबूतरों के जत्थे अपने पुरखों की सेवा का हिसाब लेने हमारे बारजों पर यूं भी चले ही आते। क्या मालूम आपकी बालकनी का कबूतर ऐसा ही कुछ पूछने की कोशिश में हो। फिर भी कबूतर हैरान तो होते होंगे कि शहर क़स्बों की दीवारों पर हकीम लुकमानी जैसों के ठीक बाद 'कबूतर जाली लगवायें' के इश्तिहार आख़िर क्यों कर लग गए हैं? हमारे हिस्से हैरानी का ये सिरा आया कि सदियों पुरानी और दुनिया भर में आज भी खेली जा रही कबूतरबाज़ी की ज़मीन पर हमने अब तक कहानियाँ क्यों नहीं रोपीं? नतीजा, पुलिस बैंड में ट्रम्पेट बजाने वाले हेड कांस्टेबल एकईस राम और उनके कबूतरबाज़ बेटे कबीर के गिर्द घटती कहानी हम आपकी नज़र कर रहे हैं। पुराने किले और गंगा के दोआब पर कबूतरों वाले आसमान के नीचे उपजा ये उपन्यास कबूतरों या कबूतरबाज़ों भर की कहानी नहीं है, ये हमारी आपकी कहानी है। कबूतरों ने तो सिर्फ़ आईना दिखाया है, क्योंकि यही तो वे करते आए हैं सैकड़ों बरसों से.... और कबूतरबाज़ भी ...
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