Henry James Ki Lokpriya Kahaniyan-Henry James
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Henry James Ki Lokpriya Kahaniyan-Henry James
About the Products:
वह पिछली पीढि़यों के बारे में जानती थी। लकड़ी काटनेवाले रईस और पगड़ी पहननेवाली उनकी पत्नियाँ तथा गोल आँखोंवाली उनकी बेटियाँ, जो अन्य दिनों में नीरस, ऊबाऊ एवं व्यापारविहीन शहरों की रौनक बढ़ाती थीं। ठोस वर्गाकार मकान व चौड़ी दीवारवाले बगीचे, हरी-भरी गलियाँ, जिनमें चर्चाओं का बाजार गरम रहता था और स्थानीय सीजन की ऐसी ही तसवीर दिखती थी। उनके पास सभाओं, डिनर, जमकर मद्यपान के निमंत्रण हुआ करते थे। अँधेरा ढलते ही चिरागों से रोशन होनेवाले पार्लर, धूल-धूसरित पुराने वाहन, पिस्तौलदान, राजमार्गों पर चलनेवाले लोग। वह एक उँगली उसकी ही तरह से महत्त्वपूर्ण स्थान पर रखती थी, जो सारी चीजों की समृद्ध सौम्यता को दरशाती थी। —इसी पुस्तक से हेनरी जेम्स संसार के प्रसिद्ध लेखकों में गिने जाते हैं। उन्होंने उच्च कोटि का कालजयी साहित्य रचा। उनकी कहानियों में संभ्रांत वर्ग की रंगीनी, सभा-समारोह, मद्य पार्टियों का जिक्र विशेष रूप से आता है। तत्कालीन सामाजिक परिवेश और ताने-बाने की बानगी देती पठनीय कहानियों का संकलन।
Language: Hindi
Page No: 176
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