Aapaatkaal: Andolan Aur Vishwasghat Ki Antarkatha-Ajay Setia
FREE shipping on orders above $55.00 USD
Shipping
| Cart Value (USD) |
Greater than $55 |
$35-$54.99 | $25-$34.99 | $15-$24.99 | Less than $14.99 |
|---|---|---|---|---|---|
| Shipping Rates(USD) |
FREE | $5.97 | $9.97 | $11.97 | $16.97 |
Enjoy hassle-free 14-day returns. Learn more in our Return Policy.
Aapaatkaal: Andolan Aur Vishwasghat Ki Antarkatha-Ajay Setia
About the Products:
25 जून, 1975 भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में काला दिन है, क्योंकि उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए देश पर आंतरिक आपातकाल लागू कर दिया था वह छह महीने पहले से आपातकाल लागू करने की योजना बना रही थी, उनका यह दावा झूठा था कि देश में आंतरिक अशांति के कारण देश की सुरक्षा को खतरा था- उन्होंने यह भी झूठ बोला था कि जयप्रकाश नारायण ने सेना से बगावत का आह्वान किया था, इसलिए उन्हें आपातकाल लगाना पड़ा- वह 25 जून को जे.पी. के भाषण से 12 घंटे पहले ही राष्ट्रपति को आपातकाल लगाने की सिफारिश करने के लिए राष्ट्रपति भवन रवाना हुई थी। इस पुस्तक में इंदिरा गांधी की तानाशाही के खिलाफ बनी विपक्ष की एकजुटता से विश्वासघात की अंतर्कथा बताई गई है कि चौधरी चरण सिंह और समाजवादियों ने कैसे जे.पी. और देश के साथ के विश्वासघात किया - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के आंदोलन के कारण ही इंदिरा गांधी चुनाव करवाने को मजबूर हुई- संघ के खिलाफ झूठा प्रचार करने वाले मार्क्सवादियों और समाजवादियों की आंदोलन में दस प्रतिशत भूमिका भी नहीं थी, चौधरी चरणसिंह तो आंदोलन के ही खिलाफ थे। देश की जनता के सामने संघ और विद्यार्थी परिषद् की बढ़ती साख से समाजवादी कुंठित हो गए थे, इसलिए उन्होंने इंदिरा गांधी के साथ मिलकर जे.पी. के प्रयासों से बनी जनता पार्टी भी तोड़ दी और मोरारजी सरकार भी गिरा दी- जे.पी. का आंदोलन इंदिरा गांधी की तानाशाही, भ्रष्टाचार, परिवारवाद के साथ-साथ जाति आधारित राजनीति के खिलाफ भी था- समाजवादियों ने सिर्फ सरकार गिराकर देश से विश्वासघात नहीं किया, बल्कि बाद में जाति आधारित पार्टियाँ बनाकर जे.पी. का सपना तोड़ा।
Language: Hindi
Page No: 240
Legal Disclaimer: Product images are for illustrative purposes only. Images/packaging/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.